राजस्थान का तेजा जी का विश्व प्रसिद्ध मेला

तेजाजी महाराज का मुख्य मेला राजस्थान के डीडवाना कुचामन जिले के परबतसर तहसील में आयोजित होता है। इसे वीर तेजाजी पशु मेले के नाम से जाना जाता है और यह एशिया के सबसे बड़े पशु मेलों में से एक है।  लाखो की संख्या में पशु बिक्री के लिए आते है। पिछले कुछ सालो से सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार यंहा 1 लाख पशुओ की बिक्री होती है। यंहा भारतवर्ष के अनेक राज्य के व्यापारी आते है और ट्रक भरकर बैलो ,गायो ,ऊंटो और घोड़ो को ले जाते है।

मेले से जुड़ी मुख्य बातें:

  • स्थापना – विक्रम संवत १७९१ में जोधपुर के महाराजा अजीत सिंह ने यहां तेजाजी का देवल बनाकर एवं उनकी मूर्ति स्थापित कर इस पशु मेले की शुरुआत की थी। यह मेला नागौरी बैलों एवं[14] बीकानेरी ऊंटों के क्रय -विक्रय के लिए प्रसिद्ध है।
  • आयोजन का समय: यह मेला हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को तेजा दशमी के अवसर पर लगता है। जो एक महीने तक लगता है।

  • महत्व: तेजा जी महाराज की स्मृति में लगाया जाता है। मान्यता है की मेले में रात के समय तेजा जी अपनी घोड़ी लीलण के साथ मेले में भर्मण करने आते है जिसे पशु पालक और पशुओ ने देखा भी और लीलण के पैरो की धमक भी सुनी है।   यहाँ तेजा जी महाराज का बड़ा और भव्य मंदिर बना हुआ है। तेजाजी को विशेष रूप से किसानों और पशुपालकों द्वारा पूजा जाता है।
  • प्रसिद्ध पशु मेला: यह मेला खास तौर पर पशु व्यापार के लिए जाना जाता है, जिसमें नागौरी नस्ल के बैल की खरीद-फरोख्त प्रमुख होती है। साथ ही यहाँ पर ऊंट और घोड़े की भी अच्छी अच्छी नस्ल आती है।
  • जन्मस्थली पर भी मेला: परबतसर के अलावा, तेजाजी की जन्मस्थली खरनाल (नागौर) में भी तेजा दशमी के दिन विशेष मेला लगता है। 

इसके अतिरिक्त, राजस्थान के अन्य जिलों जैसे अजमेर, बूंदी और ब्यावर में भी तेजाजी के सम्मान में मेले आयोजित किए जाते हैं।

Leave a Comment